Significance of roza | roza ki ahmiyat |

इरफ़ान का पहला रोज़ा ।

Ramadan story

बात है 10 साल के इरफ़ान की – एक बार इरफ़ान के अब्बू ने कहा रोज़ा रखना ख़ुदा को बहोत प्यारा है। सबसे ज्यादा सबाब मिलता है।
उसकी अम्मी सलमा ने कहा किस किस को रोज़ा रखना चाहिए रेयान के अब्बू साहिद ने बताया कि जो भी समझदार है , ख़ुदा को मानता हो, ख़ुदा का हुक्म है रोजा रखना और नमाज पढ़ना सबसे जरूरी है। हिम्मत हो जज़्बा हो उन सबको रोज़ा रखना चाहिए।
शाहिद :- देखो सलमा अब रोज़ा के वजह से साम को 4 से 6 ही दुकान दारी का समय है , देर हुआ तो फल जल्दी ही खराब हो जाएगा और फिर परेसानी बढ़ जाएगी।
इरफ़ान ये सब बात सुना और अपने अम्मी से कहा !
मैं कैसा हूँ अम्मी ?
सलमा ने जबाब दिया – मेरा लाडला सबसे अच्छा है –
इरफ़ान :- बस अच्छा हूँ।
सलमा:- अरे मेरा बेटा – दुनिया में सबसे समझदार है ।
इरफ़ान :- बस समझदार?
सलमा:- ऐसा नही बेटा – आप सबसे हिम्मत वाले -नेक हो दुनिया का सबसे अच्छा बेटा और सब हो – जो होना चाहिए।
इरफ़ान :-अम्मी रोज़ा से क्या होता है ?
सलमा :- बेटा रोज़ा रखने से ख़ुदा खुस होते हैं – और सबाब मिलता है।
इरफ़ान :- सबाब क्या होता है।
सलमा :- ख़ुदा तुम्हारी अरमान पूरा करेगा मन्नत पूरा करेगा।
इरफ़ान :- अम्मी मैं भी रोज रहूंगा !
सलमा :- आप बहोत छोटे हो इऱफान
इऱफान :- अम्मी मैं सब जानता हूँ कि किस को रोजा रहना चाहिए।
मैं हिम्मत वाला हूँ , ख़ुदा का नेक बन्दा , अच्छा हूँ ।
सलमा :- बेटे आप बहोत छोटे हो।
इरफ़ान :- अब्बू ने एक बार भी नही कहा कि रोज़ा बड़े को रहना चाहिए या छोटे को। उन्होंने बताया कि हिम्मत , नेक , समझदार , जज्बा हो वो रोज़ा रखे ।
सलमा :- बेटे दिन भर भूखे पेट – पानी का एक कतरा भी नही — ना ऐसा नही कर पायेगा मेरे बेटे !
इरफ़ान :- अम्मी किसी को रोज़ा रखने से मना करना भी गुनाह है।
सलमा :- मन मे सोच रही थी – इतना छोटा , मासूम , नादान है मेरा बेटा पर बात तो एकदम बड़ो जैसा कर रहा है। घर मे खाने के लिए कुछ नही है – है अल्लाह कैसा इम्तिहान ले रहा है तू –
( इऱफान मन मे सोच रहा है – इस बार रोज़ा रख कर मैं अपनी अम्मी के लिए एक लोहे का चिमटा ख़ुदा से मांगूंगा और अब्बू के लिए अच्छा सा सायकल और बहोत खुस हो रहा था )
इऱफान :- अम्मी बताओ न , कल से रोज़ा है या परसो से ?
सलमा :- बेटा रोज़ा कल से है – ( कमरे में जाकर अकेले में रोने लगी और सोचने लगी कि ए ख़ुदा एक रुपिया भी नही है कि रेयान के इफ्तार के लिए खजूर ले आऊं )
इऱफान :- वाह ! अम्मी मुझे सुबह जगा देना सेहरी के लिए। ( अब अम्मी को और ज्यादा दिन हाथ से रोटी नही सेकना पड़ेगा और हाथ भी नही जलेगा )
सलमा :- अच्छा ! मन मे सोच रही थी – साहिद जैसे ही जान पायेगा की
इऱफान रोज़ा के लिए जिद पर है क्या बीतेगा ।
सलमा और शाहिद तो रूखा सूखा खा कर रोज़ा रह लेते थे – पर रोज़ा में कुछ अच्छा होता तो रेयान को हिम्मत मिलती – हर माँ और बाप चाहते हैं कि बच्चे का पहला रोजा यादगार हो -पर गरीबी और हालात ऐसे नही थे।
शाहिद :- आज मानो रोजी रोटी मेरे किस्मत में नही हो।
इरफ़ान :- रात भर सुबह सेहरी के समय उठने के लिए परेसान रहा और कब नींद आई मालूम ही नही हुआ- रात भर ख्वाब में सिर्फ अम्मी के लिये चिमटा और अब्बू के लिए सायकल ही खरीदता रहा।
अचानक इऱफान को महसूस हुआ कि अम्मी अब्बू सब उठे हुए हैं और थाली में खाने के लिए 2 अमरूद था
( इऱफान को नही उठाया दोनो ने सोचा की एक टुकड़ा अमरूद खाकर दिन भर रोज़ा रहना इऱफान के लिये मुमकिन नही था )
इऱफान जब उठकर जब अम्मी अब्बू को देखा की सेहरी का अमरूद खा रहे थे , मानो इऱफान का दुनिया से बिस्वास ही उठ गया था , अपने अम्मी – अब्बू जिन्होंने बिना जगाए ही सब शुरू कर दिया था उनका चेहरा देख रहा था,
:- इऱफान अपने 10 साल के उम्र में गरीबी और परेसानी को बिना सोचे ही अम्मी – अब्बू को गलत ठहरा रहा था ।
:-अम्मी के लिए चिमटा और अब्बू के लिए सायकल इतना वो रोज़ा रहकर ख़ुदा से मांगना चाह रहा था।
ऐसे बहोत से इऱफान रोज गरीबी और परेशानी से खुद के परिवार को गलत समझ रहे होंगे।
ऐसे इऱफान आपके पास पड़ोस और जान पहचान में बहोत होंगे ,
जितना हो सके ज़कात गरीबो को सीधे उनके पास जाकर दें ।
ज़कात से बहोत से लोगो का दुआ भी मिलता रहेगा आपको।

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