Nafrat Shayari

Pyaar se nafrat shayari

फिर एक दिन हकीकत से हार कर
मोहब्बत से नफरत कर ली है हमने।

छोड़ दिया इंतज़ार करना हमेशा के लिए
जब रात गुजर सकती है तो ज़िन्दगी की क्या मजाल।

मैने अंगारे छूकर उसे बताया,
इस तरह जलता है मेरा दिल…!!
💔💔

तू ना ज़िद्द है ना मेरी मोहब्बत है
तू दर्द है तो नफरत है मेरी
जो ज़िंदा रहने के लिए
ज़रूरी सा हो गया है।

तुम बदले तो हम भी कहाँ पुराने से रहे,
तुम आने से रहे तो, हम भी बुलाने से रहे।

अजीब सा हाल है मेरी तबियत का अब
इश्क़ तेरा दिल को ज़ख्म देता है,
दर्द देख तेरा सुकून अलग मिलता है।

मोहब्बत की तलाश में ना निकलो जनाब
वह खुद तलाश लेगी जिसे बर्बाद करना है।

ज़र्रा-ज़र्रा समेट कर खुद को बनाया है मैंने
मुझसे ये ना कहना बहुत मिलेंगे तुम जैसे!

गुलाब ,ज़हर, दवा,ख्वाब, जाम क्या क्या है,
आ गया हूं में बता इंतजाम क्या क्या है।

शराब की तरह मेरे सनम के निगाहों
पे भी लिखवा दो ये सेहत के लिए हानिकारक है।

ठुकरा के मेरा प्यार मेरा इंतकाम देखेगी
प्यार ना मिला अब मेरी नफरत को तरसेगी।

मुझसे नफरत करना है तो
इरादे जरा मजबूत रखना
जरा सा भी चूके तो मोहब्बत हो जाएगी

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Nafrat is kadar hai tujhse

दोस्त बन बन के मिले
मुझको मिटाने वाले।।
मैंने देखे हैं कई रंग बदलने वाले।।

नफरत इस कदर है तुझसे
की अब मौत जब भी आए
तो मेरी आंखो में तुझसे बिछड़ने का ग़म ना हो।

खुद पर बीते तो सच लगता है
दूसरों पे गुज़रे तो खेल लगता है।

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